Sunday, April 26, 2020

काली मिर्च/Black Paper (Kali Mirch)


काली मरिच का परिचय - 
भारत में ऐसा कोई घर नहीं होगा जहाँ काली मरिच का प्रयोग (kali mirch ke fayde in hindi) नहीं होता हो। यह मसालों (Spice) की रानी मानी जाती है। चाहे हम कोई भी सब्जी बनाएं। सब्जी सूखी हो या रसेदार या फिर नमकीन से लेकर सूप आदि तक, हरेक व्यंजन में काली मरिच का प्रयोग जरूर होता है। भोजन में काली मरिच का इस्तेमाल (kali mirch uses)केवल स्वाद के लिए नहीं किया जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक (Black Pepper Health Benefits) है। काली मरिच एक अच्छी औषधि भी है। लंबे समय से आयुर्वेद में इसका औषधीय प्रयोग होता रहा है। वास्तव में काली मरिच के औषधीय गुणों के कारण ही इसे भोजन में शामिल किया जाता है। काली मरिच का प्रयोग रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

Black pepper benefits

काली मरिच के काफी अधिक औषधीय लाभ (Kali Mirch Ke Fayde In Hindi) हैं। यह वात और कफ को नष्ट करती है और कफ तथा वायु को निकालती है। यह भूख बढ़ाती है, भोजन को पचाती है, लीवर को स्वस्थ बनाती है और दर्द तथा पेट के कीड़ों को खत्म करती है। यह पेशाब बढ़ाती है और दमे को नष्ट करती है। तीखा और गरम होने के कारण यह मुँह में लार पैदा करती है और शरीर के समस्त स्रोतों से मलों को बाहर निकाल कर स्रोतों को शुद्ध करती है। इसे प्रमाथी द्रव्यों में प्रधान माना गया है। आइए जानते हैं कि आप बीमारियों को ठीक करने के लिए काली मरिच का उपयोग कैसे कर सकते हैं।

क्या है काली मरिच - 
काली मरिच (Marich Herb) एक औषधीय मसाला (Spice) है। इसे काली मिर्च (gol mirch)भी कहते हैं। यह दिखने में थोड़ी छोटी, गोल और काले रंग की होती है। इसका स्वाद काफी तीखा होता है। इसकी लता बहुत समय तक जीवित रहने वाली होती है। यह पान के जैसे पत्तों वाली, बहुत तेजी से फैलने वाली और कोमल लता होती है। इसकी लता मजबूत सहारे से लिपट कर ऊपर बढ़ती है। 

एक वर्ष में इसकी लगभग दो उपज प्राप्त होती हैं। पहली उपज अगस्त-सितम्बर में और दूसरी मार्च-अप्रैल में। बाजारों में दो प्रकार की मरिच बिकती है – सफेद मरिच और काली मरिच। कालीमिर्च की तासीर आयुर्वेद के अनुसार न शीत है और न उष्ण, लेकिन कहीं-कहीं पर इसको उष्ण तासीर का भी बताया गया है।  

कुछ लोग सफेद मरिच को काली मरिच की एक विशेष जाति मानते हैं। कोई सहिजन (Moringa) के बीजों को ही सफेद मरिच मान लेते हैं। सफेद मरिच काली मरिच (Marich Herb) का ही एक अलग रूप है। आधे पके फलों की काली मरिच बनती है तथा पूरे पके फलों को पानी में भिगोकर, हाथ से मसल कर ऊपर का छिल्का उतार देने से वह सफेद मरिच बन जाती है। छिल्का हट जाने से इसकी गरम तासीर कुछ कम हो जाती है तथा गुणों में कुछ सौम्यता आ जाती है।
 यह पाइपरेसी (Piperaceae) कुल का पौधा है। 

काली मरिच के औषधीय प्रयोग से लाभ - 
काली मरिच का भोजन में प्रयोग करने से भी आपको बहुत लाभ मिलता है। उदाहरण के लिए, ठंड के दिनों में बनाए जाने वाले सभी पकवानों में काली मिर्च का उपयोग किया जाता है ताकि ठंड और गले की बीमारियों से रक्षा हो सके। काली मरिच नपुंसकता, रजोरोध यानी मासिक धर्म के न आने, चर्म रोग, बुखार तथा कुष्ठ रोग आदि में लाभकारी है। आँखों के लिए यह विशेष हितकारी होती है। जोड़ों का दर्द, गठिया, लकवा एवं खुजली आदि में काली मरिच में पकाए तेल की मालिश करने से बहुत लाभ होता है। विभिन्न रोगों में इसका उपयोग करने की विधि यहाँ प्रस्तुत हैः-
सिर दर्द दूर करे काली मरिच का सेवन 
headache relief
एक काली मरिच (Marich Herb) को सुई की नोंक पर लगाकर उसे दीपक में जला लें। उसमें से निकलने वाले धुएं को सूंघने से सिरदर्द में आराम होता है। इससे हिचकी भी बंद होती है। सिर दर्द में काली मिर्च के फायदे बहुत लाभकारी साबित होते हैं।
भृंगराज के रस अथवा चावलों के पानी के साथ काली मरिच को पीसकर माथे पर लेप करने से आधासीसी का दर्द यानी माइग्रेन भी ठीक होता है।
सिर के जुंए (डैंड्रफ या रूसी) भगाए काली मरिच का प्रयोग 
बालों में जूँ हो जाने पर 10-12 सीताफल के बीज और 5-6 काली मिर्चों (black pepper in hindi) को पीस कर सरसों के तेल में मिला लें। इसे रात में सोने से पहले बालों की जड़ों में लगा लें। सुबह बाल धोकर साफ कर लें। जूं नष्ट हो जाएगी।
सिर के बाल यदि झड़तें हो तो काली मरिच को प्याज व नमक के साथ पीसकर लगाने से लाभ (uses of black pepper) होता है।
खाँसी-जुकाम दूर करे काली मरिच का सेवन 
काली मरिच के 2 ग्राम चूर्ण को गर्म दूध तथा मिश्री के साथ पी लेने अथवा इसके 7 दाने निगलने से जुकाम तथा खाँसी में लाभ होता है।
50 ग्राम दही, 15-20 ग्राम गुड़ और एक-डेढ़ ग्राम काली मरिच चूर्ण (Marich Herb) को मिला लें। इसे दिन में 3-4 बार सेवन करने से जुकाम में लाभ होता है।
आँखों की बीमारी में फायदेमंद काली मरिच का उपयोग
काली मरिच को दही के साथ पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी में लाभ होता है। इसे अत्यन्त सावधानीपूर्वक बाहर-बाहर ही लगाएं।
आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए रोजाना सुबह आधा से 1 ग्राम तक काली-मरिच में 1 चम्मच घी तथा आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर चाटें। बाद में दूध पीएं। इससे आंखों की बीमारी में लाभ होता है।
आँखों की पलकों पर अगर फुंसी हो जाए तो काली मरिच को पानी में घिसकर लेप करने से फुंसी पककर फूट जाती है।
काली मरिच के आधे ग्राम चूर्ण को एक चम्मच देशी घी में मिलाकर खाने से अनेक प्रकार के नेत्र रोगों का खात्मा होता है।
और पढ़े: आंखों की बीमारी में रजः प्रवर्तिनी वटी के फायदे
दांत दर्द में आराम दिलाये काली मरिच का इस्तेमाल (
काली मरिच के 1-2 ग्राम चूर्ण को 3-4 जामुन या अमरूद के पत्तों या पोस्तदानों के साथ पीस लें। इससे कुल्ला करने से दांत दर्द ठीक होता है।
गले के रोग व आवाज बैठ जाने पर भी यह प्रयोग लाभप्रद है।
सेंधा नमक, काली मरिच, शहद तथा नींबू के रस को मिला कर तालू पर लेप करने से मुँह के छाले में लाभ होता है।
दांत दर्द के लिए घरेलू इलाज
काली मरिच का सेवन से दमा-खाँसी का इलाज 
2-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण को शहद और घी (असमान मात्रा में) में मिला लें। इसे सुबह-शाम चाटने से सर्दी, सामान्य खाँसी, दमा और सीने का दर्द मिटता है। इससे फेफड़ों में जमा कफ निकल जाता है।
200 मिली गाय के दूध में 2 ग्राम काली मरिच चूर्ण को पकाकर पिलाने से दमा-खाँसी में लाभ होता है।
यदि खाँसी बार-बार उठती हो, भोजन निगलने में कष्ट हो तो दिन में 2-3 बार काली मिर्च के हल्के काढ़े से कुल्ला करें।
काली मरिच  चूर्ण 2 भाग, पीपली चूर्ण 2 भाग, अनार की छाल 4 भाग तथा जौ एक भाग का चूर्ण बना लें। इसमें 8 भाग गुड़ मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे दिन में तीन बार सेवन करने से गले का दर्द (कष्टदायक खाँसी) में लाभ होता है।
गले की खराश व खाँसी में 2-3 काली मरिच मुंह में रखकर चूसने मात्र से लाभ होता है।
दस्त रोकने के लिए करें काली मरिच का प्रयोग 
एक भाग काली मरिच की चूर्ण तथा एक भाग भुनी हींग को अच्छी तरह खरल कर लें। इसमें दो भाग शुद्ध देशी कपूर मिलाकर 125 मि.ग्राम की गोलियाँ बना लें। इसे आधे घंटे के अंतर से 1-1 गोली देने से हैजे की शुरुआती (प्रथम) अवस्था में लाभ 
काली मरिच की चूर्ण 1 ग्राम तथा भुनी हींग 1 ग्राम को अच्छी तरह खरल कर लें। इसमें 3 ग्राम अफीम मिलाकर शहद में घोटकर 12 गोलियाँ बना लें। कर 1-1 गोली 1 घंटे के अंतर से दें। बहुत समय तक न दें। इससे पेचिश में भी अत्यन्त लाभ होता है। अफीम मिले होने के कारण इसका प्रयोग सावधानी से करें।
काली मरिच चूर्ण 1/2 ग्राम, हींग 1/4 ग्राम तथा अफीम 100 मिग्रा को मिला लें। इसे जल या शहद के साथ सुबह, दोपहर तथा सायं सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।
पेट के रोगों में फायदेमंद काली मरिच का उपयोग 
2-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण को 1 कप छाछ के साथ सुबह  खाली पेट लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
8-10 काली मरिच को 5-7 ग्राम शिरीष के पत्तों के साथ पीसकर छान लें। इसे पीने से गैस के कारण होने वाले पेट दर्द और पेट फूलने में आराम मिलता है।
एक कप पानी में आधा नींबू निचोड़ लें। इसमें 5-6 काली मरिच का चूर्ण मिलाकर भोजन के बाद सुबह-शाम पीने से पैट की गैस, भूख का घटना-बढ़ना आदि में लाभ होता है।
काली मरिच के चूर्ण के साथ बराबर भाग सोंठ, पीपली, जीरा और सेंधा नमक मिला लें। 1-1 ग्राम की मात्रा में, भोजन के बाद गर्म जल के साथ लेने से अपच तथा बदहजमी में लाभ होता है।
काली मरिच, सोंठ, पीपल तथा हरड़ चूर्ण मिलाकर शहद के साथ देने से अथवा इसके काढ़े को पीने से अपच तथा पैट की गैस में लाभ (black pepper benefits in hindi)होता है।
काली मरिच के सेवन से बवासीर में फायदा 
दो ग्राम काली मरिच चूर्ण, 1 ग्राम भुना जीरा, 15 ग्राम शहद या शक्कर को मिला लें। दो बार छाछ के साथ या गर्म जल के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
काली मरिच चूर्ण 25 ग्राम, भुना जीरा चूर्ण 35 ग्राम और शुद्ध शहद 180 ग्राम को मिला लें। इसे अवलेह (चटनी) बनाकर रखें। इस अवलेह को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा  होता है।
काली मरिच (Marich Herb) और जीरे के मिश्रण में सेंधा नमक मिला लें। इसे दिन में दो बार छाछ के साथ 3-4 मास तक सेवन करते रहने से बवासीर में आराम मिलता है। इससे कमजोरी या वृद्धावस्था के कारण हुए बवासीर या गुदभ्रंश (काँच निकलना) ठीक होते हैं। इससे पाचन व जठराग्नि ठीक रहती है। कब्ज और पैट की गैस में भी यह प्रयोग लाभप्रद है।
एक ग्राम काली मरिच चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार प्रयोग करें। इससे गुदा का बाहर निकलना बंद हो जाता है।
मूत्र रोग (पेशाब संबंधी बीमारी) में फायदेमंद मरिच का इस्तेाल 
एक ग्राम काली मरिच (Marich Herb) और बराबर मात्रा में खीरा या ककड़ी के बीज को 10-15 मिली पानी के साथ पीस लें। इसमें मिश्री मिलाकर छानकर पिलाएं। इससे पेशाब में जलन तथा पेशाब में दर्द आदि की परेशानी में लाभ होता है।
नपुंसकता दूर करे काली मरिच का सेवन 
एक गिलास दूध में 8-10 काली मरिच को डाल लें। इसे अच्छी तरह उबालकर, सुबह-शाम नियमपूर्वक सेवन करने से वीर्य विकार ठीक होता है। गर्मी के मौसम में मात्रा कम की जा सकती है।
घाव सुखाने के लिए करें मरिच का उपयोग 
काली मरिच को पानी में पीसकर फोड़े-फुंसियों व सूजन पर लेप करने से घाव सुख जाता है। इससे घाव जल्दी भर जाते हैं और सूजन दूर होती है।
हिस्टीरिया में फायदेमद मरिच का प्रयोग 
3 ग्राम वच चूर्ण में 1 ग्राम काली मरिच का चूर्ण मिला लें। इसे खट्टी दही के साथ सुबह खाली पेट सेवन करने से हिस्टीरिया में लाभ होता है।
चेहरे के लकवा में लाभकारी है मरिच का प्रयोग 
अर्दित रोग यानी फेशियल पैरालिसिस में चेहरे के अंगों में लकवा मार देता है। यदि जीभ में जकड़न हो तो मरिच (Marich Herb) के चूर्ण को जीभ पर घिसने से लाभ होता है।
काली मरिच चूर्ण को किसी भी वातशामक तेल में मिला लें। इसे लकवाग्रस्त अंग पर मालिश करने से बहुत लाभ होता है। काली मिर्च खाने के फायदे चेहरे पर लकवा मारने में बहुत फायदेमंद होता है
कमजोरी दूर कर शारीरिक ताकत बढ़ाए काली मरिच का सेवन 
कमजोरी आलस्य, उदासीनता आदि दूर करने के लिए काली मरिच  के 4-5 दाने, सोंठ, दालचीनी, लौंग और इलायची थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिला लें। इसे चाय की तरह उबाल लें। इसमें दूध और शक्कर मिलाकर पीने से लाभ होता है। कमजोरी दूर करने में काली मिर्च के औषधीय गुण बहुत फायदेमंद साबित होते हैं।
बुखार उतारे काली मरिच का प्रयोग 
1-3 ग्राम काली मरिच चूर्ण में आधा लीटर पानी और 20 ग्राम मिश्री मिलाकर आठवाँ भाग शेष रहने तक उबाल कर काढ़ा बना लें। इसे सुबह, दोपहर तथा शाम पिलाने से साधारण बुखार यानी वायरल फीवर में लाभ होता है।
5 दाने काली मरिच, अजवायन एक ग्राम और हरी गिलोय 10 ग्राम, सबको 250 मिली पानी में पीस, छानकर पिलाने से तेज बुखार में लाभ होता है।
एक ग्राम काली मरिच चूर्ण को शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से गैस के कारण होने वाला बुखार तथा पेट दर्द दूर होता है ।
 बुखार में गिलोय का उपयोग
शरीर का पोषण बढ़ाने में फायदेमंद काली मरिच 
कालीमिर्च में आयुर्वेद के अनुसार ऐसे गुण होते है जो कि शरीर के पोषण को बढ़ावा देते है विशेष रूप से दीपन का गुण जो कि पाचकाग्नि का बढ़ा कर शरीर को पोषण देने में मदद कर करता है। 
वजन कम करने में फायदेमंद काली मरिच 
अगर आप बढ़े हुए वजन से परेशान है तो, कालीमिर्च का सेवन आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है। क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार कालीमिर्च में पाये जाने वाला एक तत्व चर्बी यानि फैट को कम करने में मदद करता है। 
गठिया का दर्द कम करे काली मरिच का औषधीय गुण 
गठिया दर्द को कम करने में कालीमिर्च एक अच्छा उपाय है, क्योंकि कालीमिर्च में आयुर्वेद के अनुसार वात को कम करने का गुण होता है। जिसके वजह से गठिया का दर्द को कम होने में मदद मिलती  है। आयुर्वेद में गठिया को वात प्रधान रोग माना जाता है। 
कैंसर के इलाज में काली मरिच फायदेमंद 
कालीमिर्च का सेवन कैंसर को फैलने से रोकने में आपकी मदद कर सकता है, क्योंकि कालीमिर्च में एंटी- कैंसर का गुण पाया जाता है जो कि कैंसर को फैलने से रोकने में मदद करता है। 
अवसाद या डिप्रेशन को कम करने में उपयोगी काली मरिच का सेवन 
कालीमिर्च का सेवन आपको डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है क्योंकि रिसर्च के अनुसार इसमें पाये जाने वाले एल्कलॉइड में एंटी -डिप्रेशन का गुण पाया जाता है।  
विटिलिगो के इलाज में काली मरिच का औषधिय गुण फायदेमंद 
विटिलिगो की समस्या में कालीमिर्च का उपयोग फ़ायदेमंद हो सकता है, क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार कालीमिर्च का जब बाहरी रूप से प्रयोग किया जाता है तो ये पिगमेंटेशन को बढ़ाकर रोगों के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
इस्तेमाल के लिए काली मरिच के उपयोगी हिस्से 
फल 
काली मरिच के सेवन की मात्रा 
चूर्ण – 1-2 ग्राम
औषधि के रूप में काली मरिच का इस्तेमाल से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।
काली मरिच से नुकसान
इन रोगों की अवस्था में काली मरिच का उपयोग नहीं करना चाहिएः-
घाव
एसिडिटी
खूनी बवासीर
गर्भावस्था की अवस्था
काली मरिच कहाँ पाई या उगाई जाती है 
काली मरिच  के पौधे का मूल स्थान दक्षिण भारत ही माना जाता है। पूरी दुनिया में काली मरिच की पैदावार सबसे ज्यादा भारत में हीं होती है। भारत से बाहर इंडोनेशिया, बोर्नियो, इंडोचीन, मलय, लंका और स्याम इत्यादि देशों में भी इसकी खेती की जाती है। कुछ वन प्रदेशों में यह स्वयं उत्पन्न होती है, लेकिन दक्षिणी भारत के उष्ण और आर्द्र भागों में काली मरिच की बेलें बोई जाती हैं। काली मरिच के कारण ही एक समय भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति था।                जैविक खेती ट्रेनिंग एवं ज्यादा जानकारी के लिए आप संपर्क कर सकते है किसान भाईयो अगर आपको यह  जानकारी अच्छी लगी है तो कृपया करके ज्यादा ज्यादा लोगों तक पहुंचाए। 
धन्यवाद। 

English Translation

Introduction of Black paper (Kali mirch) -

 There will be no house in India where Kali mirch is not used.  She is considered the queen of spices.  No matter which vegetable we make.  Whether the vegetable is dry or juicy or from salted to soup etc., black marich is definitely used in every dish.  Kali mirch uses in food are not used only for taste.  It is also very beneficial for health (Black Pepper Health Benefits).  Kali marich is also a good medicine.  It has been used medicinally in Ayurveda for a long time.  In fact, due to the medicinal properties of Kali Marich, it is included in the food.  Kali marich is also used to cure diseases.

 Black pepper benefits

 Kali Mirch has significantly more medicinal benefits.  It destroys wind and phlegm and removes phlegm and air.  It increases appetite, digests food, makes liver healthy and ends pain and stomach worms.  It increases urination and destroys asthma.  Due to hot and hot it produces saliva in the mouth and purifies the sources by removing the excreta from all the sources of the body.  It is considered to be predominant among the predominant liquids.  Let us know how you can use Kali Marich to cure diseases.

 What is Kali Marich -
 Marich Herb is a medicinal spice.  It is also called gol mirch.  It is slightly smaller, round and black in appearance.  It tastes very pungent.  Its creeper is going to live long.  It has a pan-like leaf, spreads very fast and is soft.  Its creeper grows up with a strong support.

 It gets about two yields in a year.  First yield in August-September and second in March-April.  Two types of marich are sold in the markets - white marich and black marich.  According to Ayurveda, the effect of black pepper is neither cold nor hot, but at some places it has also been described as hot Tasir.

 Some consider white marich to be a special caste of black marich.  Some consider Moringa seeds to be white marich.  White marich is a different form of Marich Herb.  Black marich of half ripe fruit is formed and by soaking whole ripe fruits in water, mashing it with hands and removing the top skin, it becomes white marich.  Due to the removal of the skin, its hot effect decreases slightly and the properties get some mildness.
 It is a plant of Piperaceae family.

 Benefits of medicinal use of black marich-
 You also get a lot of benefit by using black marich in food.  For example, pepper is used in all dishes made on cold days to protect against cold and throat diseases.  Kali Marich is beneficial in impotence, amenorrhea i.e. absence of menstruation, skin diseases, fever and leprosy.  It is especially beneficial for the eyes.  Massaging oil cooked in black marich with joint pain, arthritis, paralysis and itching is very beneficial.  Here is the method to use it in various diseases: -
 Use of black marich to relieve headaches
 headache relief
 Burn a black marich (Marich Herb) with a needle at the tip of a needle.  Smelling the smoke emanating from it relieves headache.  It also stops hiccups.  The benefits of black pepper prove to be very beneficial in headache.
 Grind black marich with the juice of Bhringraj or rice, and apply it on the forehead, the pain of migraine is also cured.
 Use of fleece (dandruff or dandruff) black marich
 After getting lice in the hair, grind 10-12 seeds of sitaphal and 5-6 black pepper in black mustard oil and mix it with mustard oil.  Apply it on the roots of hair before sleeping at night.  Wash hair and clean it in the morning.  The lice will perish.
 If head hair falls, grinding black marichin with onion and salt is beneficial.
 Use black marich to cure cough and cold
 Drinking 2 grams of black marich powder with hot milk and sugar candy or swallowing 7 grains of it provides relief in cold and cough.
 Add 50 grams of curd, 15-20 grams of jaggery and one-half gram of black marich powder.  Taking it 3-4 times a day is beneficial in colds.
 Use of beneficial black marich in eye disease
 Grind black marrow with curd and apply it like mascara in the eyes, it provides relief in night blindness.  Apply it very carefully outside.
 To increase the light of the eyes, lick half to 1 gram of black marich in the morning every morning with one spoon of ghee and sugar candy as needed.  Drink milk later.  It is beneficial in eye disease.
 If there is pimple on the eyelids, then rubbing black marich in water and applying it makes the pimples burst.
 Eating half a gram powder of black marich in a spoonful of native ghee ends many types of eye diseases.
 Read more: Raja in eye disease: benefits of pravartini vati
 Use black marich to relieve toothache
 Grind 1-2 grams of black marich powder with 3-4 berries or guava leaves or poppy seeds.  Rinse with this helps to relieve toothache.
 This experiment is beneficial even if the throat diseases and voice are sitting down.
 Mixing rock salt, black marich, honey and lemon juice and applying it on the palate is beneficial for mouth blisters.
 Home remedies for toothache
 Treatment of asthma by using black marich
 Mix 2-3 grams of black marichine powder in honey and ghee (uneven amount).  Licking it in the morning and evening cures cold, common cough, asthma and chest pain.  This removes phlegm accumulated in the lungs.
 Cook 2 grams black marichine powder in 200 ml cow's milk and give it to the patient for asthma.
 If the cough arises frequently, there is difficulty in swallowing food, then rinse it with a light decoction of black pepper 2-3 times a day.
 Prepare 2 parts black pepper powder, 2 parts pepper powder, 4 parts of pomegranate bark and one part of barley.  Mix 8 parts jaggery in it and make tablets of 1-1 gram.  Taking it thrice a day provides relief in throat pain (painful cough).
 Sucking 2-3 black maricha in the mouth with throat sore and coughing is beneficial.
 Use black marich to stop diarrhea
 Take one part black powder and one part roasted asafoetida properly.  Mix 125 parts gram of pure desi camphor in it and make tablets of 125 mg.  Giving it 1-1 tablet with a difference of half an hour benefits in early (first) stage of cholera
 Take 1 gram black marich powder and roasted asafetida 1 gram properly.  Mix 3 grams of poppy and mix it in honey and make 12 tablets.  Give 1-1 tablet with a difference of 1 hour.  Do not give too long.  It is also very beneficial in dysentery.  Use it carefully as opium is found.
 Mix 1/2 gram black pepper powder, 1/4 gram asafoetida and 100 mg of opium.  Taking it with water or honey in the morning, afternoon and evening helps in dysentery.
 Use of beneficial black marich in stomach diseases
 Taking 2-3 grams black marichine powder with 1 cup buttermilk on an empty stomach in the morning removes stomach worms.
 Grind 8-10 black maricha with 5-7 grams shirish leaves and sieve.  Drinking it provides relief in stomach ache and flatulence due to gas.
 Squeeze half a lemon in a cup of water.  Mixing 5-6 black maricha powder in it and drinking it after meals in the morning and evening is beneficial in gas, increase appetite, etc.
 Mix equal parts dry ginger, pipal, cumin and rock salt with black marich powder.  Taking 1-1 gram with lukewarm water after meals is beneficial in indigestion and indigestion.
 Mixing black pepper, dry ginger, peepal and myrobalan powder with honey or drinking its decoction has benefits in indigestion and black pepper benefits (black pepper benefits).
 Use of black marich benefits in piles
 Mix two grams black marichine powder, 1 gram roasted cumin, 15 grams honey or sugar.  Taking it twice with buttermilk or with hot water is beneficial in piles.
 Mix 25 grams black marichine powder, 35 grams roasted cumin powder and 180 grams pure honey.  Keep it avlaah (chutney).  Take 3 to 6 grams of this Avalah thrice a day.  It is beneficial in piles.
 Add rock salt to the mixture of black marich and cumin.  Taking it twice a day with buttermilk for 3-4 months provides relief in piles.  It cures piles or haemorrhage (glass) due to weakness or old age.  This helps in digestion and gastrointestinal healing.  This use is also beneficial in constipation and pat gas.
 Use one gram black marigold powder with honey thrice a day.  This stops the exit of the anus.
 Use of beneficial marches in urinary disease
 Grind one gram of Marich Herb and equal quantity of cucumber or cucumber seeds with 10-15 ml of water.  Mix sugar candy in it and sieve it.  It provides relief in burning sensation in urination and pain in urination.
 Use black marich to remove impotence
 Pour 8-10 black maricha in a glass of milk.  By boiling it properly, taking it regularly in the morning and evening cures semen disorder.  The quantity can be reduced in the summer season.
 Use maricha to dry wounds
 Grind black marich in water and apply it on boils and pimples to cure wounds.  By this, wounds heal quickly and swelling ends.
 Use of beneficial marich in hysteria
 Mix 1 gram black marich powder in 3 grams Vacha powder.  Taking it on empty stomach in the morning with sour curd is beneficial in hysteria.
 Use of marich is beneficial in facial paralysis
 In Ardit disease, facial paralysis paralyzes facial organs.  If there is tightness in the tongue, rubbing the powder of Marich Herb on the tongue is beneficial.
 Add black marich powder to any ginger oil.  Massaging it on paralyzed limb is very beneficial.  Benefits of eating black pepper is very beneficial in paralysis of face
 Remove black weakness and increase physical strength
 Add 4-5 grains of black marich, dry ginger, cinnamon, cloves and cardamom to remove weakness, laziness, apathy etc.  Boil it like tea.  Mixing milk and sugar in it, drinking it is beneficial.  The medicinal properties of black pepper prove to be very beneficial in removing weakness.
 Use of black marich with fever
 Mix half a liter of water and 20 grams of sugar candy in 1-3 grams of black marichine powder and boil until the eighth part remains.  Drinking it in the morning, afternoon and evening is beneficial in simple fever ie viral fever.
 Grind 5 grains of black marich, 1 gram of bishops weed and 10 grams of green Giloy, all in 250 ml of water and filter it and give it to the patient, it provides relief in high fever.
 Taking one gram black marichine powder with honey thrice a day ends gas fever and stomachache.
 Use of Giloy in fever
 Kali Marich beneficial in increasing body nutrition
 According to Ayurveda, black pepper has properties that promote the nutrition of the body, especially the properties of lamp which helps in nourishing the body by increasing digestion.
 Kali Marich beneficial in reducing weight
 If you are troubled by the increased weight, then the consumption of black pepper can be beneficial for you.  Because according to a research, an element found in black pepper helps in reducing fat.
 Medicinal properties of black marich to reduce arthritis pain
 Black pepper is a good remedy to reduce arthritis pain, because black pepper has the property of reducing vata according to Ayurveda.  Because of which it helps in reducing the pain of arthritis.  In Ayurveda arthritis is considered as the primary disease.
 Black marich is beneficial in the treatment of cancer
 Consuming black pepper can help prevent cancer from spreading, as black pepper has anti-cancer properties that help prevent cancer from spreading.
 Use of black marich useful in reducing depression or depression
 The use of black pepper can help you to reduce the symptoms of depression because according to research, the alkaloids found in it have anti-depressant properties.
 Pharmacological properties of black marich beneficial in the treatment of vitiligo
 The use of black pepper can be beneficial in the problem of vitiligo, as according to a research, when pepper is used externally, it helps to reduce the symptoms of diseases by increasing pigmentation.
 Useful parts of black marich for use
 The fruit
 Intake of black marich
 Powder - 1-2 grams
 Consult an Ayurvedic doctor before using black marich as a medicine.
 Black marich damage
 Black marich should not be used in the condition of these diseases: -
 wound
 acidity
 Bloody piles
 Pregnancy stage
 Where black marich is found or grown
 The original place of Kali Marich plant is believed to be South India.  India has the highest production of black marich in the world.  Outside India, it is also cultivated in Indonesia, Borneo, Indochina, Malay, Lanka and Syam, etc.  In some forest areas it is self-produced, but in the hot and humid parts of southern India, black marich vines are sown.  At one time India was the largest economic power in the world due to Kali Marich.  For organic farming training and more information, you can contact farmer brothers, if you like this information, please do so and reach more people.
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