Tuesday, April 28, 2020

Cataract /मोतियाबिन्द

मोतियाबिंद
(CATARACT)


परिचय :

मोतियाबिंद कनीनिका में चोट लगने के कारण, आंखों में किसी तरह की चोट लगने के कारण, बुढ़ापे की हालत में, मधुमेह (शूगर यानी डायबिटीज), गठिया (जोड़ों के दर्द), वृक्क प्रदाह (गुर्दे की जलन) और धमनी रोग आदि रोगों के कारणों से आंखों में हो जाता है। यह दो तरह का होता है कोमल और कड़ा। कोमल मोतियाबिंद नीले रंग का होता है। यह बचपन से लेकर 35 वर्ष तक की आयु में होता है। कड़ा मोतियाबिंद वृद्धावस्था में होता है जिसका रंग पीला होता है। मोतियाबिंद एक या दोनों आंखों में हो सकता है। इस रोग में आंखों से देखने की शक्ति धीरे-धीरे कम हो जाती है। अंत में पूरी तरह से देखने की शक्ति चली जाती है।

लक्षण :

आंखों की अंशत: या पूरी अपारदर्शिता को मोतियाबिंद कहते हैं। इसकी शुरुआती अवस्था में आंखों की रोशनी कम हो जाती है और वह ऐसी चीजें देखने लगता है जो वास्तव में होती ही नहीं है जैसे मकड़ी के जाले आदि। रोग के बढ़ने के साथ ही आंखों की रोशनी कम होती चली जाती है और अंत में व्यक्ति पूरी तरह से अंधा हो जाता है।

भोजन और परहेज :

पिसा हुआ आंवला या मुरब्बा, पपीता, पका हुआ आम, दूध, घी, मक्खन, शहद, कालीमिर्च, घी-बूरा, सौंफ-मिश्री, गुड़ और सूखा धनिया, चौलाई पालक या कढ़ी पत्ती से बनी दाल, बथुआ, सहजना, पोदीना, धनिया, पत्तागोभी, मेथी पत्ती, कढ़ी पत्ती (मीठे नीम की पत्तियां) आदि कैरोटीन प्रधान पत्तियों वाली वनस्पतियां, अंकुरित मूंग, गाजर, बादाम, शहद आदि का सेवन मोतियाबिंद को दूर करने मे बहुत सहायक है। मैदा, चीनी, धुले हुए चावल, खीर, उबले हुए आलू, हलवा, चिकनाई वाला भोजन, चाय, कॉफी, शराब, अचार, टाफियां और चाकलेट आदि का सेवन मोतियाबिंद के रोगी को नहीं करना चाहिए।

उपचार :

  • जिस औरत के लड़का हो उसके दूध में भीमसेनी कपूर को घिसकर आंखों में लगाने से या नौसादर को सूरमे की तरह आंखों में डालने से मोतियाबिंद में आराम हो जाता है। ध्यान रहे कि इसका प्रयोग गुलाबजल में मिलाकर भी किया जा सकता है।
  • स्वस्थ आंखों में असली शहद की एक सलाई 7 दिनों में 1 से 2 बार डालने से आंखों की रोशनी कभी कम नहीं होगी, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ तेज होती चली जायेगी। साथ ही खाने के लिए 4 बादाम रात को पानी में भिगोकर रख लें और सुबह उठते ही 4 कालीमिर्च के साथ पीसकर मिश्री के साथ चाटे या वैसे ही चबा जाएं और ऊपर से दूध पियें। इससे आंखों का मोतियाबिंद नष्ट हो जाता है।
  • 90 ग्राम छोटी मक्खी का शहद, 10 मिलीलीटर अदरक का रस, 10 मिलीलीटर नींबू का रस और 10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस। इन सबको मिलाकर और छानकर एक-एक बूंद सुबह-शाम काफी समय तक डालते रहें। इससे मोतियाबिंद दूर हो जाता है। इसमें 120 मिलीलीटर गुलाबजल मिलाकर रोजाना इसी प्रकार डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और चश्मा हट जाता है।
  • 10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 10 मिलीलीटर अदरक का रस, 10 मिलीलीटर नींबू का रस और 50 मिलीलीटर शहद को मिला लें। इस रस की 2-2 बूंदें रोजाना आंखों में डालने से मोतियाबिंद कट जाता है।
  • लगभग 10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 10 मिलीलीटर असली शहद (छोटी मिक्खयों का पतला शहद), 2 ग्राम भीमसेनी कपूर इन तीनों को अच्छी तरह मिलाकर शीशी में रख लें। रात को सोने से पहले कांच की सलाई से आंखों में लगाने से शुरुआती मोतियाबिंद जल्दी ही रुक जाता है। यदि उतरा हुआ भी हो तो भी साफ हो जाता है।
  • 10-10 मिलीलीटर प्याज और अदरक के रस को 40 ग्राम शहद में मिलाकर आंखों में सुबह-शाम लगाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है।
  • 6 से 12 ग्राम त्रिफला चूर्ण को 15 से 25 ग्राम घी के साथ दिन में 3 बार लेने से मोतियाबिंद में आराम मिलता है।
  • ठंडे पानी या त्रिफला के काढ़े से मोतियाबिंद की बीमारी में आंखों को धोने से लाभ होता है।
  • पीपल, उशीर मूल, पारसपीपल और उदुम्बर का काढ़ा, हरिद्रा प्रकन्द चूर्ण और उशीरमूल चूर्ण को गर्म घी में मिलाकर 15 से 25 ग्राम की मात्रा में मिलाकर सुबह-शम लेना चाहिए। इससे मोतियाबिंद के मरीज को आराम मिलता है।
  • 1 लीटर आमलकी फलों का रस लें। इसे गर्म कर लें और 50 ग्राम घृत (घी) और 50 ग्राम मधु (शहद) मिला लें। इसका आंखों में काजल के समान प्रयोग करना चाहिए। इससे मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।
  • नीम के बीज का चूर्ण नियमित रूप से थोड़ी सी मात्रा में लगाने से मोतियाबिंद के रोग में लाभ होता है।
  • अडूसे के पत्तों को साफ पानी से धोकर पत्तों का रस निकाल लें। इस रस को अच्छे पत्थर की खल में डालकर (ताकि पत्थर घिसकर दवा में न मिले।) मूसल से कूटकर निकालना चाहिए। जब इसका रस सूख जाए तो इसे आंखों में काजल की तरह लगाने से सभी तरह के मोतियाबिंद में आराम आता है।
  • नए मोतियाबिंद में ताजे स्वमूत्र (खुद के पेशाब की) दो से तीन बूंदें आंखों में रोजाना दो से तीन बार डालने से शुरुआती मोतियाबिंद ठीक हो जाता है या बढ़ने से रुक जाता है। स्वमूत्र (खुद के पेशाब को) चौड़े मुंह के कांच की साफ शीशी में ढककर रख दें और 15 मिनट बाद या पूरी तरह से ठंडा होने पर ही इससे आंखों को धोएं या दो-तीन बूंदें आंखों में डालें। यह प्रयोग दो से तीन महीने तक करने से मोतियाबिंद में लाभ मिलता है।
  • भुने हुए नौसादर को बारीक पीसकर सोते समय सलाई द्वारा आंखों में लगाने से मोतियाबिंद में आराम होगा।
  • नींबू का रस, अदरक का रस, सफेद प्याज का रस 10-10 मिलीलीटर और छोटी मक्खी का शहद 90 ग्राम मिलाकर छान लें। इसके बाद 1-1 बूंद सुबह-शाम को 2 बार लगभग एक महीने तक आंखों में डालते रहने से मोतियाबिंद दूर होता है।
  • नींबू का रस, पटोल पत्र और गुडूची तना को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इस काढे़ को घृत (घी) के साथ दिन में 2 बार लेने से लाभ होता है।
  • रसांजन, कसीस और गुड़ को मिलाकर मोतियाबिंद की बीमारी में अंजन (काजल) के रूप में आंखों में लगाने से आराम मिलता है।
  • धनिए को पीसकर बारीक करके थोड़े-से धनिया को पानी में उबाल लें। इसके बाद इसे ठंडा करके कपड़े में छानकर आंखों में डालने से मोतियाबिंद में लाभ मिलता है।
  • एक चम्मच पिसी हुई धनिया को पानी में उबाल लें। फिर उसे छानकर ठंडा होने पर आंखों में डालें। इससे मोतियाबिंद ठीक हो जाता है।
  • बेल के पत्तों पर घी लगाकर तथा सेंककर आंखों पर बांधने से, पत्तों का रस आंखों में टपकाने से, साथ ही पत्तों को पीसकर मिश्रण बनाकर लेप करने से आंखों के कई रोग मिट जाते हैं।
  • विषखपड़ा (गदपुरैना, पुनर्नवा) जो सफेद फूलवाली हो, उसकी जड़ भंगरैया के पत्ते के रस के साथ पीसकर रोजाना 2 से 3 बार आंखों में लगाने से काफी आराम आता है। इसका प्रयोग कुछ दिनों तक लगातार करने से मोतियाबिंद समाप्त हो जाता है। आंखों की रोशनी में चमक आ जाती है। इसे दृष्टि दाता बूटी कहते हैं। गदपुरैना के रस को शहद में मिलाकर लगाने से आंखों के कई रोगों में लाभ होता है।
  • लगभग 1 ग्राम सेंधानमक और 5 ग्राम सत गिलोय को पीसकर शहद में मिलाकर आंखों में सुबह-शाम लगाने से मोतियाबिंद में आराम होता है।
  • लगभग 310 मिलीलीटर गाजर के रस में 125 मिलीलीटर पालक का रस मिलाकर पीने से मोतियाबिंद दूर हो जाता है।
  • लगभग 15 से 30 ग्राम निशोथ के बारीक पाउडर से बने काढ़े को गर्म घी और 15 से 30 मिलीलीटर दशमूल के काढ़े के साथ दिन में 3 बार लेने से मोतियाबिंद की बीमारी से रोगी को छुटकारा मिलता है।
  • पिप्पलीफल और सेंधानमक को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर उसका पाउडर तैयार कर लें। इसे शहद के साथ अंजन (काजल) के समान आंखों में लगाना चाहिए।
  • आक के दूध में पुरानी ईंट का महीन चूर्ण (10 ग्राम) तरकर सुखा लें। फिर उसमें लौंग (6 नग) मिलायें। इसे लोहे के खरल में भली प्रकार से महीन करके बारीक कपडे़ से छान लें। इस चूर्ण को चावल भर नासिका द्वारा प्रतिदिन सुबह नस्य लेने से मोतियाबिंद में शीघ्र लाभ होता है। इससे सर्दी-जुकाम में भी लाभ होता है।
English Translation

Cataracts

 introduction :
 Due to injury to cataract, tuberculosis, due to any injury to the eyes, in the condition of old age, diabetes (sugar), arthritis (joint pain), renal inflammation (kidney irritation) and arterial disease etc.  Gets in the eyes for reasons.  It is of two types, soft and hard.  The tender cataract is of blue color.  It occurs from childhood to the age of 35 years.  Severe cataract occurs in old age, which is yellow in color.  Cataracts can occur in one or both eyes.  In this disease, the sight of eyes is gradually reduced.  In the end the power to see the whole is gone.

 Symptoms :

 Partial or complete opacity of the eyes is called cataract.  In its initial state, the eyesight decreases and it starts seeing such things which do not really happen like spider webs etc.  As the disease progresses, the eyesight becomes less and eventually the person becomes completely blind.

 Food and diet:

 Powdered gooseberry or jam, papaya, ripe mango, milk, ghee, butter, honey, black pepper, ghee, fennel, jaggery and coriander, jaggery and dried coriander, chaulai spinach or curry leaf pulses, bathua, sajna, mint,  Vegetables with carotene staple leaves, sprouted moong, carrot, almond, honey etc. such as coriander, cabbage, fenugreek leaf, kadhi leaf (sweet neem leaves) etc. are very helpful in cataract.  Flour, sugar, washed rice, kheer, boiled potatoes, pudding, greasy food, tea, coffee, alcohol, pickles, toffees and chocolate, etc. should not be taken by a cataract patient.

 the treatment :

 For a woman who has a boy, by applying Bhimseni Kapoor in his eyes, applying it in the eyes or putting sal-ammonia in the eyes, the cataract gets relief.  Keep in mind that it can also be used by mixing rose water.

 Adding a paste of real honey to healthy eyes 1 to 2 times in 7 days will never reduce the eyesight, but will intensify with aging.  Also, keep 4 almonds soaked in water at night for eating and after waking up in the morning, grind it with 4 black peppers and lick it with sugar candy or chew it and drink milk on top.  It cures cataract of the eyes.

 90 grams small fly honey, 10 ml ginger juice, 10 ml lemon juice and 10 ml white onion juice.  Mixing and filtering all these, keep one drop every morning and evening for a long time.  It cures cataract.  Mixing 120 ml rose water in it and adding it daily increases the eyesight and removes the glasses.

 Mix 10 ml white onion juice, 10 ml ginger juice, 10 ml lemon juice and 50 ml honey.  Cataract is cut by putting 2-2 drops of this juice in the eyes daily.

 Mix about 10 ml of white onion juice, 10 ml real honey (thin honey of small mixes), 2 grams Bhimseni Kapoor and keep them in a bottle.  Applying the glass to the eyes before going to bed at night prevents early cataracts.  It clears even if landed.

 Mix 10-10 ml onion and ginger juice in 40 grams of honey and apply it to the eyes twice a day, it provides relief in cataract.

 Taking 6 to 12 grams of Triphala powder with 15 to 25 grams of ghee 3 times a day provides relief in cataract.

 Washing eyes with cataract with cold water or decoction of Triphala is beneficial.

 A decoction of peepal, Ushir root, Parasipal and Udumbar, Haridra Prakand churna and Ushermul powder mixed with hot ghee should be taken in the morning and evening by mixing 15 to 25 grams.  This provides relief to the patient of cataract.

 Take 1 liter of Amalaki fruit juice.  Heat it and mix 50 grams of ghee (ghee) and 50 grams of honey (honey).  It should be used in the eyes like kajal.  It cures cataract.

 Applying small amounts of neem seeds powder regularly is beneficial in cataract disease.

 Wash the leaves of malabar nut with clean water and extract the juice from the leaves.  Put this juice in the stone of a good stone (so that the stone is not mixed in the medicine by grinding it).  When its juice becomes dry, applying it like mascara in the eyes provides relief in all types of cataracts.

 In new cataracts, two to three drops of fresh swamutra (own urine) into the eyes two to three times daily, cures the initial cataract or stops growing.  Cover the Svamutra (your own urine) in a clean glass vial of a wide mouth, and after 15 minutes or when it is completely cold, wash the eyes or add two to three drops to the eyes.  Using this for two to three months provides relief in cataract.

 Finely grinding roasted salivary and applying it in the eyes at the time of sleeping will help in cataract.

 Mix lemon juice, ginger juice, white onion juice 10-10 ml and small fly honey 90 grams and filter it.  After that, one drops cataract by putting 1-1 drops in the eyes twice a day in the morning and evening for about one month.

 Prepare decoction by taking equal quantity of lemon juice, Patol Patra and Guduchi stem.  Taking this decoction with ghee 2 times a day is beneficial.

 Mixing Rasanjan, Kasis and Jaggery in the eyes of cataract in the form of Anjan (Kajal) provides relief in the eyes.

 Finely grind coriander and boil some coriander in water.  After that, cooling it in a cloth and putting it in the eyes provides relief in cataract.

 Boil one spoon ground coriander in water.  Then filter it and cool it in the eyes.  It cures cataract.

 By applying ghee on the vine leaves and roasting it, tying the juice of the leaves in the eyes, as well as grinding the leaves and applying the mixture, it cures many eye diseases.

 Visakhapada (Gadpurana, Punarnava), which is a white florist, grinding its root with the juice of bhangraya leaves and applying it in the eyes 2 to 3 times daily provides great relief.  Cataract is eliminated by using it continuously for a few days.  There is a glow in the light of the eyes.  This is called the herb of the eye.  Applying the juice of Gadpurana mixed with honey is beneficial in many diseases of the eyes.

 Grind about 1 gram rock salt and 5 grams Sat Giloy mixed with honey and apply it to the eyes twice a day, it provides relief in cataract.

 Cataract is cured by drinking 125 ml spinach juice mixed with about 310 ml carrot juice.

 Taking a decoction made of fine powder of about 15 to 30 grams of Nisoth with warm ghee and 15 to 30 ml decoction of Dashmool 3 times a day relieves the patient from cataract disease.

 Grind equal quantity of pipplefal and rock salt and prepare powder from it.  It should be applied in the eyes similar to Anjan (Kajal) with honey.

 Dry the old brick fine powder (10 grams) in mud milk.  Then add cloves (6 nos) to it.  Finely filter it in iron kharel and sieve it finely.  By taking this powder with rice and nasal vein every morning, there is an immediate benefit in cataract.  It is also beneficial in cold and cold.

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