Saturday, May 9, 2020

बांझपन (Sterlity)

बांझपन (Sterlity)
परिचय :

संतानोत्त्पत्ति क्षमता न होने या गर्भ न ठहर पाने की स्थिति को बन्ध्यापन (बांझपन) कहते हैं। पुरुषों के शुक्र दोष और स्त्रियों के रजोदोष के कारण ही ऐसा होता है। अत: बंध्यापन चिकित्सा में पुरुषों के वीर्य में वीर्य कीटों को स्वस्थ करने, वीर्य को शुद्ध करने की व्यवस्था करें और स्त्रियों को रजोदोष से मुक्ति करें। इससे संतान की प्राप्ति होगी।

बंध्या दोष दो प्रकार का होता है। पहला प्राकृतिक जो जन्म से ही होता है। दूसरा जो किन्ही कारणों से हो जाता है। इसमें पहले प्रकार के बांझपन की औषधि नहीं है। दूसरे प्रकार के बांझपन की औषधियां हैं। जिनके सेवन से बांझपन दूर हो जाता है।

कारण :

किसी भी प्रकार का योनि रोग, मासिक-धर्म का बंद हो जाना, प्रदर, गर्भाशय में हवा का भर जाना, गर्भाशय पर मांस का बढ़ जाना, गर्भाशय में कीड़े पड़ जाना, गर्भाशय का वायु वेग से ठंडा हो जाना, गर्भाशय का उलट जाना अथवा जल जाना आदि कारणों से स्त्रियों में गर्भ नहीं ठहरता है। इन दोषों के अतिरिक्त कुछ स्त्रियां जन्मजात वन्ध्या (बांझ) भी होती है। जिन स्त्रियों के बच्चे होकर मर जाते हैं उन्हें `मृतवत्सा वन्ध्या` तथा जिनके केवल एक ही संतान होकर फिर नहीं होती है तो उन्हें `काक वन्ध्या` कहते हैं।

उपचार :

मैनफल के बीजों का चूर्ण 6 ग्राम केशर के साथ शक्कर मिले दूध के साथ सेवन करने से बन्ध्यापन अवश्य दूर होता है। इस औषधि के प्रयोग से गर्भाशय की सूजन, मासिक-धर्म का कष्ट के साथ आना, अनियमित स्राव आदि विकार नष्ट हो जाते हैं।

गर्भाशय की शिथिलता (ढीलापन) के चलते यदि गर्भाधान न हो रहा तो तेजपात (तेजपत्ता का चूर्ण) 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय की शिथिलता दूर हो जाती है तथा स्त्री गर्भधारण के योग्य बन जाती है।

कभी-कभी किसी स्त्री को गर्भाधान ही नहीं होता है बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। किसी को गर्भ रुकने के बाद गर्भस्राव हो जाता है। तेजपत्ते का पाउडर दोनों ही समस्याओं को खत्म करता है। तेजपत्ते का पाउडर चौथाई चम्मच की मात्रा में तीन बार पानी से नियमित लेना चाहिए। कुछ महीने तेजपात की फंकी लेने से गर्भाशय की शिथिलता दूर होकर गर्भाधान हो जाता है जिन स्त्रियों को गर्भस्राव होता है, उन्हें गर्भवती होने के बाद कुछ महीने तेजपत्ते का पाउडर लेना चाहिए। इस तरह तेजपत्ते से गर्भ सम्बन्धी दोष नष्ट हो जाते हैं और स्त्री गर्भधारण के योग्य हो जाती है।

वह पुरुष जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ होता है, यदि प्रतिदिन तक सोते समय दो बड़े चम्मच दालचीनी ले तो वीर्य में वृद्धि होती है और उसकी यह समस्या दूर हो जाएगी।

यदि गर्भाशय में वायु (गैस) भर गई हो तो थोड़ी-सी काली हींग को कालीतिलों के तेल में पीसकर तथा उसमें रूई का फोहा भिगोकर तीन दिन तक योनि में रखे। इससे बांझपन का दोष नष्ट हो जाएगा। प्रतिदिन दवा को ताजा ही पीसना चाहिए।

पीपल वृक्ष की जटा का चूर्ण 5 ग्राम मासिकस्राव (मासिक-धर्म) के चौथे, पांचवे, छठे और सातवे दिन सुबह स्नानकर बछड़े वाली गाय के दूध के साथ सेवन किया जाए तो बन्ध्यापन मिटकर गर्भवती होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

पीपल की डोडी कच्ची 250 ग्राम, शक्कर 250 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लें। मासिक-धर्म के बाद 10 ग्राम चूर्ण मिश्री और दूध के साथ सुबह-शाम देना चाहिए। इसे 10 दिनों तक लगातार सेवन करने से लाभ मिलता है।

पीपल के सूखे फलों का चूर्ण कच्चे दूध के साथ आधा चम्मच की मात्रा में, मासिक-धर्म शुरू होने के 5 दिन से 2 हफ्ते तक सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से बांझपन दूर होगा। यदि लाभ न हो तो आप अगले महीने भी यह प्रयोग जारी कर सकते हैं।

लगभग 250 ग्राम पीपल के पेड़ की सूखी पिसी हुई जड़ों में 250 ग्राम बूरा मिलाकर पति व पत्त्नी दोनों, जिस दिन से पत्त्नी का मासिकधर्म आरम्भ हो, 4-4 चम्मच गर्म दूध में रोजाना 11 दिन तक फंकी लें। जिस दिन यह मिश्रण समाप्त हो, उसी रात से 12 बजे के बाद रोजाना संभोग (स्त्री प्रंसग) करने से बांझपन की स्थिति में भी गर्भधारण की संम्भावना बढ़ जाती है।

पीपल के सूखे फलों के 1-2 ग्राम चूर्ण की फंकी कच्चे दूध के साथ मासिक-धर्म के शुद्ध होने बाद 14 दिन तक देने से औरत का बांझपन मिट जाता है।

ढाक (छिउल) के बीजों की भस्म राख बना लें, इसे माहवारी खत्म होने के बाद स्त्री को 3 ग्राम की मात्रा में मिश्री मिले दूध के साथ खिलाना चाहिए। इससे बांझपन दूर हो जाता है।

यदि गर्भाशय शीतल (ठंडा) हो गया तो बच, काला जीरा, और असगंध इन तीनों को सुहागे के पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखने से उसकी शीतलता दूर हो जाती है। इस प्रयोग के चौथे दिन मैथुन करने से गर्भ ठहर जाता है।

सुबह के समय 5 कली लहसुन की चबाकर ऊपर से दूध पीयें। यह प्रयोग पूरी सर्दी के मौसम में रोज करने से स्त्रियों का बांझपन दूर हो जाता है।

जिस स्त्री के गर्भाधान ही नहीं होता, वह चुटकी भर दालचीनी पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर अपने मसूढ़ों में दिन में कई बार लगायें। थूंके नहीं। इससे यह लार में मिलकर शरीर में चला जाएगा। एक दम्पत्ति को 14 वर्ष से संतान नहीं हुई थी, महिला ने इस विधि से मसूढ़ों पर दालचीनी, शहद लगाया, वह कुछ ही महीनों में गर्भवती हो गई और उसने पूर्ण विकसित दो सुन्दर जुड़वा बच्चों का जन्म दिया।

यदि किसी स्त्री को मासिक-धर्म नियमित रूप से सही मात्रा में होता होता हो, परन्तु गर्भ नहीं ठहरता हो तो उन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 1 वर्ष तक लगातार करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है।

छोटा गोखरू और तिल को समान मात्रा में लेकर, चूर्ण बनाकर रख लें। इसे 4 से 8 ग्राम सुबह-शाम बकरी के दूध में सेवन करने से गर्भाशय शुद्ध होकर बांझपन नष्ट हो जाता है। यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि गोखरू दो प्रकार का होता है। एक छोटा और दूसरा बड़ा। यहां छोटे गोखरू के बारे में लिखा गया है। बड़े वाले गोखरू में यह क्षमता नहीं होती है।

लगभग 10-20 ग्राम गोखरू के फल के चूर्ण की फंकी देने से स्त्रियों में बांझपन का रोग मिट जाता है।

यदि गर्भाशय में कीडे़ पड़ गये हों तो हरड़, बहेड़ा, और कायफल, तीनों को साबुन के पानी के साथ सिल पर महीन पीस लें, फिर उसमें रूई का फोहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखना चाहिए। इस प्रयोग से गर्भाशय के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

समुन्दरफल, कालानमक और थोड़ा सा लहसुन पीसकर, रूई के फाहे में लपेटकर योनि में रखने से जला हुआ गर्भाशय ठीक हो जाता है। यदि इससे जलन होने लगे तो फाहे को निकालकर फेंक देना चाहिए तथा दिन में एक बार इसे पुन: रखना चाहिए। इसे ऋतुकाल (माहवारी) के पहले दिन से लेकर तीसरे दिन तक योनि में रखना चाहिए।

कायफल को कूट-छानकर चूर्ण बना लें, फिर उसमें बराबर मात्रा में शक्कर मिलाकर रख लें। ऋतु स्नान के तीन दिनों तक इस चूर्ण को एक मुट्ठी भर सेवन करते हैं। पथ्य में केवल दूध और चावल का सेवन करना चाहिए। इसके चौथे दिन संभोग करने से गर्भ ठहर जाता है।

छोटी पीपल, सोंठ, कालीमिर्च तथा नागकेसर तीनों को समान मात्रा में पीसकर रख लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में गाय के घी में मिलाकर मासिक-स्राव के चौथे दिन स्त्री को सेवन करायें तथा रात को संभोग करें तो उसे पुत्र की प्राप्ति होती है।

कीकर (बबूल) के वृक्ष में चार-पांच गज की उंचाई पर एक फोड़ा सा निकलता है। जिसे कीकर का बान्दा कहा जाता है। इसे लेकर कूटकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में माहवारी के समाप्ति के अगले दिन से तीन दिनों तक सेवन करें। फिर पति के साथ संभोग करे इससे गर्भ अवश्य ही धारण होगा।

मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि संतान न होती हो तो रूई के फाये में फिटकरी लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आता रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि बांझपन रोग समाप्त हो गया है।

गुग्गुल एक ग्राम और रसौत को मक्खन के साथ मिलाकर प्रतिदिन तीन खुराक सेवन करने से श्वेतप्रदर के कारण जो बन्ध्यापन होता है। वह दूर हो जाता है। अर्थात श्वेतप्रदर दूर होकर बन्ध्यापन (बांझपन) नष्ट हो जाता है।

अमरबेल या आकाशबेल (जो बेर के समान वृक्षों पर पीले धागे के समान फैले होते हैं) को छाया में सुखाकर रख लें। इसे चूर्ण बनाकर मासिक-धर्म के चौथे दिन से प्रतिदिन स्नान के बाद 3 ग्राम चूर्ण 3 ग्राम जल के साथ सेवन करना चाहिए। इसे नियमित रूप से नौ दिनों तक सेवन करना चाहिए। सम्भवत: प्रथम आवृत्ति में ही गर्भाधान हो जाएगा। यदि ऐसा न हो सके तो योग पर अविश्वास न कर अगले आवृत्ति में भी प्रयोग करें, इसे घाछखेल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी कच्चे धागे के क्वाथ (काढ़ा) से गर्भपात होता है।

बिजौरा नींबू के बीजों को दूध में पकाकर, एक चम्मच घी मिलाकर मासिकस्राव के चौथे दिन से प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से गर्भ की स्थापना निश्चित रूप से होती है। पन्द्रह दिनों तक क्रम नियमित रूप से जारी रखना चाहिए। यदि पहले महीने में गर्भधारण न हो तो अगले मासिकस्राव के चौथे दिन से इसे पुन: जारी करना चाहिए। यह प्रयोग व्यर्थ नहीं जाता है। इससे गर्भधारण अवश्य ही होता है।

यदि गर्भाशय उलट गया हो तो कस्तूरी और केसर को समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर गोली बना लें। इस गोली को ऋतु (माहवारी होने के पहले) भग (योनि) में रखें। इसी प्रकार तीन दिनों तक गोली रखने से गर्भाशय ठीक हो जाता है।

20-20 ग्राम की मात्रा में नौसादर और बीजा बेल को पीसकर चार गोली 10-10 ग्राम की बना लें। एक गोली रजस्वला के साथ खाएं। दूध का सेवन करे। गर्भ शुद्ध होने पर संभोग करना चाहिए। यदि पांचवें, सातवें, नौवे, ग्यारहवें, तेरहवें दिन संभोग करें तो पुत्र की प्राप्ति होगी।

असंगध, नागकेसर और गोरोचन इन तीनों को समान मात्रा में बराबर मात्रा में लेकर पीस-छान लें। इसे शीतल जल के साथ सेवन करें तो गर्भ ठहर जाता है।

असगंध का चूर्ण 50 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर कपड़छन कर लें। जब रजस्वला स्त्री स्नान करके शुद्ध हो जाए तो 10 ग्राम इसका सेवन घी के साथ करें। उसके बाद संभोग करें तो इससे बांझपन दूर होकर महिला गर्भवती हो जाएगी।

सफेद आक की छाया में सूखी जड़ को महीन पीसकर, एक-दो ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ सेवन स्त्री को करायें। शीतल पदार्थो का पथ्य देवें। इससे बंद ट्यूब व नाड़ियां खुलती हैं, व मासिक-धर्म व गर्भाशय की गांठों में भी लाभ होता है।

बांझ स्त्री (जिस औरत के बच्चा नहीं होता) को गाजर के बीजों की धूनी इस प्रकार दें कि उसका धुंआं रोगिणी की बच्चेदानी तक चला जाए। इसके लिए जलते हुए कोयले पर गाजर के बीज डालें। इससे धुंआ होगा। इसी धूनी को रोगिणी को दें तथा रोजाना उसे गाजर का रस पिलायें। इससे बांझपन दूर हो जाएगा।

Infertility (Sterlity)
 introduction :
 The condition of lack of childbearing ability or failure to conceive is called bondage (infertility).  This happens only due to the Venus Dosh of men and the Rajodosh of women.  Therefore, in bondage therapy, arrange for semen pests in men’s semen, purify semen and rid women of menstruation.  This will give children. 

 Bandhya dosha is of two types.  The first natural which occurs from birth.  The second one is done for whatever reasons.  It does not have the first type of infertility medicine.  There are other types of infertility drugs.  Those who consume infertility disappear.

 reason :

 Any type of vaginal disease, menstruation stops, leucorrhoea, air filling in the uterus, enlargement of the flesh on the uterus, worms in the uterus, cooling of the uterus by air velocity, uterine inversion  Due to reasons like burning or burning, women do not stay pregnant.  Apart from these doshas, ​​some women also have congenital vandhya (infertile).  Women who die as children are called 'dead mortals' and who do not have only one child again, then they are called 'Kak Vandhya'.

 the treatment :

 Consuming 6 grams powder of manphal seeds along with sugar mixed with saffron milk, removes bonding.  With the use of this drug, swelling of the uterus, coming with the pain of menstruation, irregular discharge, etc. disorders are destroyed.

 If pregnancy is not happening due to uterine dysfunction (loosening), taking 1 to 4 grams of Tejapat (powder of bay leaves) in the morning and evening ends the uterine dysfunction and the woman becomes eligible for pregnancy.

 Sometimes a woman does not have conception and has to face the problem of infertility.  Miscarriage occurs after someone stops pregnancy.  Baylor powder eliminates both problems.  Teaspoon powder should be taken regularly with water three times a quarter teaspoon.  Taking a few months of fasting, the uterine dysfunction becomes conception, and women who have miscarriage should take powder of bay leaf a few months after getting pregnant.  In this way, the defects of pregnancy are destroyed by bay leaf and the woman becomes capable of conception.

 The man who is unable to bear a child, if he takes two tablespoons of cinnamon at bedtime every day, then the semen will increase and his problem will go away.

 If the air (gas) is filled in the uterus, then grind a little black asafetida in black oil and soak cotton foil in it and keep it in the vagina for three days.  This will eliminate the defect of infertility.  The medicine should be grind fresh daily.

 If 5 grams powder of peepal tree powder is consumed with milk of calf cow after bathing in the morning on the fourth, fifth, sixth and seventh day of menstruation (menstruation), it will be good to get pregnant by eradicating the bond.

 Prepare the powder by taking 250 grams of raw peppers, 250 grams of sugar.  After menstruation, 10 grams of powder should be given in the morning and evening along with sugar and milk.  Taking it continuously for 10 days is beneficial.

 Consuming half a teaspoon of the powder of dried fruits of peepal with raw milk, taking it daily in the morning and evening for 5 days to 2 weeks after the onset of menstruation, will remove infertility.  If there is no benefit then you can continue this experiment next month also.

 Mix 250 grams of boora in the dry ground roots of about 250 grams of Peepal tree and sprinkle in 4-4 teaspoons of hot milk daily for 11 days, both from the day the husband starts his monthly period.  The day after this mixture is finished, after 12 o'clock from the same night, having intercourse daily (female pregnancy) increases the chances of conception even in the event of infertility.

 Giving 1-2 grams of powder of dried fruits of peepal with funky raw milk for 14 days after menstrual purification ends the infertility of a woman.

 Make ash consumed of seeds of Dhaka (Chiul), after the end of menstruation, the woman should feed 3 grams of milk with sugar-candy.  It ends infertility.

 If the uterus becomes cold, then grind the remaining, black cumin, and disgruntle and grind them in lukewarm water and soak a cotton swab in it and keep it in the vagina for three days.  Mating on the fourth day of this experiment stops pregnancy.

 Chew 5 buds of garlic in the morning and drink milk from above.  By doing this experiment daily during the entire winter season, infertility of women goes away.

 For a woman who does not have a conception, apply a pinch of cinnamon powder to one spoon of honey and apply it to her gums several times a day.  Do not spit.  By this, it will be mixed with saliva and go into the body.  A couple had not had children for 14 years, the woman applied cinnamon, honey to the gums by this method, she became pregnant within a few months and gave birth to two fully grown twins.

 If a woman is having the right amount of menstruation regularly, but does not become pregnant, then those women should conceive by chewing basil seeds or grinding them in water or taking decoction during menstruation.  goes.  If the pregnancy is not established, do this experiment continuously for 1 year.  By using this, the uterus becomes healthy and able to conceive.

 Take equal quantity of small caltrop and sesame and keep the powder.  Taking 4 to 8 grams of goat milk in the morning and evening cleanses the uterus and destroys infertility.  It should be noted here that Gokharu is of two types.  One small and the other big.  It has been written about the small bunion.  Larger bunches do not have this capability.

 Applying about 10-20 grams powder of bunion fruit gets rid of infertility in women.

 If there are insects in the uterus, then grind the harad, bahera, and kayphal, all three on the cob with soapy water, then soak cotton foil and put it in the vagina for three days.  Uterine worms are destroyed by this use.

 Grind the seaweed, black salt and a little bit of garlic, wrap it in cotton swab and keep it in the vagina to cure burnt uterus.  If it starts to irritate, then throw out the leaf and keep it once a day.  It should be kept in the vagina from the first day of menstruation (menstruation) to the third day.

 Make powder by filtering the kayphal, then mix equal quantity of sugar in it and keep it.  A handful of this powder is consumed for three days of the Ritual bath.  Only milk and rice should be consumed in the diet.  By intercourse on its fourth day, the pregnancy is stopped.

 Grind small peppers, dry ginger, black pepper and Nagakesar in equal quantity.  Mix 6 grams of this powder in cow's ghee and consume it on the fourth day of menstruation, and if you have sexual intercourse at night, you get a son.

 A boil emerges at a height of four to five yards in a tree of acacia (acacia).  Which is called the bandar of keikar.  Grind it and dry it in the shade and make the powder.  Take three grams of this powder from the next day after the end of menstruation.  Then have intercourse with the husband, it will definitely result in pregnancy.

 If the menstrual period is not cured, if there are no children, then wrap alum in cotton wool and soak it in water and keep it in the vagina at night.  In the morning, the milk will accumulate in the cotton.  Keep the foya until the khurchan comes.  When the constipation stops, it should be understood that the infertility disease has ended.

 Mixing one gram of Guggul and Rasaut with butter, and taking three doses daily, is a result of the leprosy that is binding.  He turns away.  That is, white catarrh is removed and bondage (infertility) is destroyed.

 Dry Amarabel or Akashbel (which spreads like yellow thread on trees like plum) in the shade.  After making this powder, after bathing daily from the fourth day of menstruation, 3 grams of powder should be consumed with 3 grams of water.  It should be consumed regularly for nine days.  Possibly, in the first instance, conception will occur.  If this cannot be done then do not distrust yoga and use it in the next instance also, it is also known as Ghachkhel.  Abortion is caused by the decoction of its raw thread.

 Bijoura lemon seeds are cooked in milk, mixed with a spoonful of ghee and drinking it daily morning and evening from the fourth day of menstruation definitely establishes the womb.  The order should be continued regularly for fifteen days.  If there is no pregnancy in the first month, then it should be re-released from the fourth day of the next menstrual cycle.  This experiment does not go in vain.  This definitely leads to pregnancy.

 If uterus is reversed, grind oysters and saffron in equal quantity and grind it with water to make a pill  Keep this tablet in the vagina (before menstruation).  Similarly, keeping the pill for three days cures the uterus.

 Grind 20-20 grams sal-ammonia and beej vine and make four tablets of 10-10 grams each.  Eat one tablet with menstruation.  Drink milk  Sexual intercourse should be done when the womb is pure.  If you have sexual intercourse on the fifth, seventh, ninth, eleventh, thirteenth day, a son will be achieved.

 Asangadh, Nagkesar and Gorochan take the same quantity in equal quantity and grind them.  If you consume it with cold water, then the womb stops.

 Grind 50 grams powder of unblemished powder and sprinkle it.  When the menstruation woman is purified after bathing, then take 10 grams of it with ghee.  After intercourse, the woman will become pregnant by removing infertility.

 Finely grind the dry root under the shade of white mud, take one to two grams with 250 ml cow's milk and take it to the woman.  Diet of cold substances.  This opens closed tubes and nadis, and also benefits in menstruation and uterine lumps.

 Give the infertile woman (the woman who does not have children) fumigation of carrot seeds in such a way that her smoke goes up to the womb of the patient.  For this, put carrot seeds on the burning coal.  It will cause smoke  Give this fumigation to Rogini and give her carrot juice daily.  This will eliminate infertility.

Thanks. 
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