Saturday, May 30, 2020

धूम्रपान तथा सिगरेट छोड़ने के लिए जरुरी उपाय / To quit Smoking



परिचय :

धूम्रपान हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक होता है। धूम्रपान का अर्थ है- धुंआ पीना। बीड़ी, सिगरेट, भांग, गांजा, हुक्का आदि को पीने से दूषित धुंआ फेफड़े व वायु नली में जाकर उसे रोगग्रस्त बना देता है। इसके सेवन से स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार एक सिगरेट पीने से व्यक्ति की आयु प्रतिदिन लगभग 5 या 6 मिनट कम हो जाती है। मानव 24 घंटे में 21,600 बार श्वांस लेता है किंतु धूम्रपान श्वसन के प्रत्येक हिस्से पर हानिकारक प्रभाव डालता है। इससे नाक, गला, श्वासनली तथा फेफड़ों की श्लेष्मा झिल्ली में सूजन आ जाती है जिसके कारण खांसी आने लगती है। धूम्रपान करने से सबसे अधिक कैंसर का खतरा होता है। सिगरेट के कागज में टार नाम पदार्थ कार्सिनोजेनिक होता है। श्वासनली के संकरेपन से हार्टअटैक हो सकता है। धूम्रपान से उत्पन्न होने वाली विषैली गैसे, जैसे कार्बनमोनाक्साइड, हाइड्रोजन ऑक्साइड एवं ऑक्सीडाइट निकोटीन वायुमण्डल में फैलकर आस-पास बैठे लोगों के भी अन्त:श्वसन में पहुंचकर हानि पहुंचाती है तथा यह अनेक बीमारियों को जन्म देती है, जैसे फेफड़ों का कैंसर, हार्ट अटैक, अस्थमा, दमा क्षय रोग आदि।

धूम्रपान से होने वाली हानियां :

  • धूम्रपान से ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कैंसर, मुंह और गले का कैंसर, खांसी, दमा, जुकाम, हार्टअटैक और हृदय के विभिन्न खतरनाक रोग उत्पन्न होते हैं।
  • धूम्रपान से मुंह का स्वाद बिगड़ना, पेट का रोग, अनिद्रा (नींद का न आना), जुकाम, बलगम, खांसी, दांतों का रोग, हाथों में पीलापन, मुंह की बदबू, सूंघने की शक्ति कम होना तथा आंखों की रोशनी कम होना आदि।
  • धूम्रपान करने से फेफड़ों के अवकों में विटामिन की कमी हो जाती है जिससे कैंसर होने की संभावना रहती है।
  • धूम्रपान से पाचन क्रिया, श्वसन प्रणाली और नाड़ी को क्षति पहुंचती है जिसके फलस्वरूप व्यक्ति की आकिस्मक मृत्यु हो सकती है।
  • धूम्रपान के धुएं में निकोटिन और कार्बनडाइऑक्साइड मिला होता है जिससे आंखों की रोशनी कम हो जाती है।
  • धूम्रपान करने से यौवन शक्ति घटती है। एक बीड़ी या एक सिगरेट पीने वाले मनुष्य की आयु प्रतिदिन 6 मिनट कम होती है। बीड़ी या सिगरेट पीने के 20 मिनट बाद ही तम्बाकू का सेवन करने से टार, निकोटिन विष शरीर में फैल जाता है।
  • धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में मानसिक कमजोरी आ जाती है।
  • धूम्रपान करने वालों में एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम व हानिकारक एल.डी.एल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है जिससे रक्तवाहिनियों में वसा का जमाव बढ़ जाता है।
  • धूम्रपान रक्त जमने की क्रिया को अनियमित करता है व एक प्रकार की रक्तकणिका पर कई प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
  • सिगरेट के प्रत्येक कश के साथ 50-50 माइक्रोग्राम निकोटीन रक्त में पहुंचता है। यह नाइकोएफिनेफ्रीन के स्तर को बढ़ाता है। इसके कारण शरीर की अनेक क्रियाएं बिगड़ जाती है। रक्त की पी.एच. बिगड़ जाती है जिससे सिगरेट पीने की आदत पड़ जाती है।
  • धूम्रपान करने वाले को यदि मधुमेह हो जाए तो धूम्रपान के दुष्प्रभावों के कारण मधुमेह पर नियंत्रण करना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि धूम्रपान के कारण इंसुलिन स्राव करने वाली ग्रंथि पैंक्रियाज की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
  • धूम्रपान के कारण रक्तवाहिकाओं की फैलने-सिकुड़ने की क्रिया घट जाती है जिससे हृदय की गति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  • धूम्रपान करने से दमा रोग हो जाता है।
  • धूम्रपान करने वालों में, धूम्रपान न करने वालों की अपेक्षा पांच गुना अधिक हृदयाघात की आशंका रहती है।
  • धूम्रपान करने वाले माता या पिता के कारण फेफड़े का कैंसर उनके होने वाले बच्चों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है।

धूम्रपान करने वालों के पास बैठने वालों के लिए चेतावनी :

  • बीड़ी, सिगरेट पीने वालों के द्वारा छोड़ा गया धुंआ जब आप के शरीर में प्रवेश करता है तो फेफड़ों के कैंसर होने की संभावना रहती है।
  • धूम्रपान से निकला धुंआ आंखों में जलन पैदा करता है तथा आंखों की रोशनी को कम करता है।
  • बीड़ी, सिगरेट से उत्पन्न धुंए में दुगना निकोटीन तथा वेजापायनि होता है जिससे कैंसर पैदा होता है। धुंए में 5 गुना कार्बोनमोनोक्साइड, 50 गुना अमोनिया तथा पर्याप्त मात्रा में कैडमियम होता है जो फेफड़ों के वायुकोष नष्ट करता है। बीड़ी, सिगरेट की गैस प्राणघातक होती है जो खून के लाल कणों से टकराती है और उसे हानि पहुंचाती है।
  • सिगरेट का धुंआ महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर बुरा प्रभाव डालता है। सिगरेट पीने वाली महिलाओं में अण्डाशय की खराब होने की आशंका बढ़ जाती है जिससे उनकी प्रजनन अवधि घट जाती है और उसमें रजोनिवृत्ति समय से पूर्व ही आरम्भ हो जाती है। सिगरेट के धुएं में मौजूद पोलीसाइक्लिक एरोमेटिक हाइड (पीएएच) नामक रसायन अण्डाशय में मौजूद अण्डों को नष्ट करता है।

जर्दा खाने वालों के लिए चेतावनी :

  • तम्बाकू का प्रत्येक मिश्रण कैंसर का उत्पादक होता है।
  • खाने वाले तम्बाकू के पत्तों में प्रोसेसिंग तथा क्योरिंग में 100 गुना तक विष बढ़ जाता है।
  • खाने वाले तम्बाकू में टी.एन.एस विष अधिक होता है। इसलिए तम्बाकू का सेवन नहीं करना चाहिए।

धूम्रपान का हानिकारक प्रभाव :

  • अत्यधिक धूम्रपान नपुंसकता का कारण बन सकता है। धूम्रपान करने से रक्त की सरंचना में विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर में स्थित यौन हार्मोन उचित क्रिया नहीं कर पाते हैं।
  • घर में किए गए धूम्रपान के धुएं से अवयस्क बच्चों व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है और बच्चों के मूत्र में निकोटीन का एक सह-उत्पाद कोटनाइन पाया जा सकता है। यह कोटनाइन असमय ही बच्चों के लिंग पर दबाव डालने लगता है और बच्चों की कामुक प्रवृत्ति (सेक्सुवल पावर) बढ़ने लगती है। बच्चों को धूम्रपान की प्रवृत्ति से बचाने के लिए बच्चों के सामने धूम्रपान नहीं करना चाहिए।
  • कम उम्र के व्यक्ति तेजी से लकवे से पीड़ित हो रहे हैं। इसका कारण पान मसालों का सेवन है।
विशेष नोट : गुटखा, तम्बाकू, पान का उपयोग नहीं करना चाहिए। गुटखों में छिपकली का चूरा, चूहा मारने की दवा एवं ऐसी घातक चीजें मिलाई जाती है जिससे गुटखा एक विशेष स्वाद नशा करने वालों की जबान पर चढ़ जाता है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि गुटखा खाने वालों का अपना एक ब्राण्ड होता है। यदि व ब्राण्ड न मिले तो गुटखा खाने वाले परेशान हो जाते हैं।

उपचार :

  • बीड़ी, सिगरेट, जर्दा आदि का सेवन करने की आदत पड़ गई हो तो धूम्रपान के स्थान पर नींबू का रस चूसना चाहिए। इससे धूम्रपान की इच्छा समाप्त हो जाती है। इसलिए जब भी धूम्रमान की इच्छा हो तो नींबू का सेवन करना चाहिए।
  • 1 चम्मच शहद में 1 चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर एक शीशी में रख लें। जब भी बीड़ी, सिगरेट, जर्दा खाने की इच्छा हो तब इसका सेवन करें। इससे धूम्रपान की आदत छूट जाती है।
  • रात को एक कप पानी में 2 चम्मच नमक घोलकर इसमें 125 ग्राम मेथी भिगो दें और सुबह पानी छानकर फेंक दें एवं मेथी में 2 नींबू निचोड़कर तवे पर सेंक लें। धूम्रपान करने, तम्बाकू, जर्दा खाने की इच्छा होने पर आधा चम्मच यह मेथी मुंह में रखकर चूसते रहें। इससे धूम्रपान की आदत छूट जाती है। इससे नाड़ियों की रुकावट दूर होकर आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • यदि आप बीड़ी सिगरेट आदि को छोड़ना चाहते हैं तो सौंफ को घी में सेंककर रख लें और जब भी सिगरेट पीना की इच्छा हो तो सौंफ आधा चम्मच चबाएं। इससे सिगरेट पीने की इच्छा समाप्त होती है।
  • 50 ग्राम अजवायन तथा मोटी सौंफ 50 ग्राम लेकर इसमें स्वादानुसार कालानमक व नींबू का रस मिलाकर छाया में सुखा लें और फिर इसे तवे पर भूनकर रख लें। जब भी बीड़ी, सिगरेट या जर्दा खाने की इच्छा हो तो यह चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में सेवन करें। इससे धूम्रपान की आदत छूट जाती है।
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