Thursday, June 18, 2020

चेचक / Small Pox

शीतला, चेचक और मसूरिका
(Chiken Pox)


उपचार :

  •  चेचक होने पर हल्दी और अपामार्ग की जड़ को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर चंदन की तरह हाथ और पैरों के सभी नाखूनों पर लगा दें। इसका एक तिलक माथे पर और एक जीभ पर लगा देने से बच्चों को चेचक (माता) नहीं निकलती है।
  • तुलसी के पत्तों के रस में अजवायन को पीसकर शरीर में लेप करने से अन्दर दबी हुई चेचक (माता) बाहर आ जाती है।
  • जब चेचक निकलने की शुरुआती अवस्था हो तो लगभग एक ग्राम के चौथाई भाग से कम केसर को बारीक पीसकर, बिना बीज के मुनक्के के साथ खाने से चेचक जल्दी ही बाहर निकल कर ठीक हो जाती है।
  • चेचक में पैरों के तलुवों की फुंसियों में जलन हो उन पर चावलों का पानी लगाने से आराम आता है।
  • थोड़ी-थोड़ी जावित्री कई बार रोगी को खिलाने से अन्दर दबी हुई चेचक (माता) बाहर निकल आती है।
  • जावित्री को बिल्कुल बारीक पीसकर एक ग्राम के चौथाई भाग से कम की मात्रा में दिन में 3 से 4 बार पानी के साथ रोगी को खिलाने से अन्दर दबी हुई चेचक (माता) बाहर आ जाती है।
  • गोबर के उपले की राख और गोबर का बारीक चूर्ण चेचक के दानों में लगाने से मवाद निकलना बन्द हो जाता है।
  • बेर का चूर्ण गुड़ के साथ खाने से मसूरिका (छोटी माता) जल्दी ही पक जाती है।
  • सिरस के पेड़ की छाल, लिसौढ़े के पेड़ की छाल, पीपल के पेड़ की छाल और गूलर के पेड़ की छाल को एक साथ बारीक पीसकर गाय में घी में मिला दें। फिर इसे शरीर में जहां पर चेचक (माता) के दाने हो वहां पर लगाने से दानों की गर्मी, जलन आदि में आराम होता है।
  • सत्यानाशी (पीला धतूरा) के मुलायम पत्तों को गुड़ के साथ मिलाकर खाने से चेचक (माता) नहीं निकलती है।
  • आड़ू के रस में शहद को मिलाकर पीने से कफज-मसूरिका ठीक हो जाती है।
  • करेले के पत्तों के रस में हल्दी का चूर्ण मिलाकर पीने से रोमान्तिका, बुखार और मसूरिका रोग में लाभ होता है।
  • नीम, आंवला, त्रिकुटा (सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल का चूर्ण), पटोलपत्र, पित्तपापड़ा, सफेद चंदन, लाल चंदन, अड़ूसा और धमासा को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे ठंड़ा करके इसमें मिश्री और शहद मिलाकर पीने से पित्तज-मसूरिका (माता के दानों की वजह से गर्मी) के रोग में लाभ होता है।
  • यदि चेचक फैली हुई हो तो अड़ूसा का एक पत्ता तथा 3 ग्राम मुलेठी को मिलाकर काढ़ा बनाकर बच्चों को पिलाने से चेचक का भय नहीं रहता है।
  • अड़ूसा, गिलोय, नागरमोथा, पटोलपत्र, धनिया, जवासा, चिरायता, नीम, कुटकी और पित्तपापड़ा को मिलाकर इसका काढ़ा बनाकर पीने से रुकी हुई मसूरिका (छोटी माता) में लाभ होता है।
  • अगर मसूरिका (छोटी माता) के दानों में से पानी निकल रहा हो तो उसके दानों पर बरगद, पीपल, पाकर और मौलश्री के पेड़ की छाल को पीसकर लगाने से आराम आ जाता है।
  • मुलहठी, बहेड़ा, आंवला, मूर्वा, दारूहल्दी की छाल, नील कमल, खस, लोध और मजीठ को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और आंखों के ऊपर या आंखों में लगाये। इससे मसूरिका (छोटी माता) ठीक हो जाती है।
  • हल्दी और इमली के बीजों को बराबर मात्रा में पीसकर चुटकी भर 7 दिनो तक लेने से माता (चेचक) नहीं निकलती। चेचक के निकलने पर इमली के बीज का चूर्ण हल्दी में मिलाकर लेने से चेचक जल्दी ठीक हो जाता है। चेचक के दानों में अगर घाव हो जाये तो पान के कत्थे को हल्दी के संग सूखा ही छिड़के तो उनमें आराम पड़ जाता है।
  • कुटज की छाल को चावल के पानी में पीसकर लेप करने से चेचक के कारण चेहरे पर फफोले, दाने आदि नहीं होते हैं।
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